अकीदा

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इस्लाम में संतान होना: एक पवित्र अमानत, आजीवन ज़िम्मेदारी और जन्नत का रास्ता
Tahiru Nasuru··23 मिनट पढ़ने का समय

इस्लाम में संतान होना: एक पवित्र अमानत, आजीवन ज़िम्मेदारी और जन्नत का रास्ता

इस्लाम में संतान होना केवल व्यक्तिगत इच्छा, सामाजिक अपेक्षा या वैवाहिक जीवन का स्वाभाविक चरण नहीं है। यह अल्लाह ﷻ की ओर से एक पवित्र अमानत है। बच्चे को सिर्फ़ घर में जन्म नहीं मिलता, बल्कि वह उसके सुपुर्द किया जाता है—उसके शरीर, दिल, दिमाग़, आचरण, दीन और आख़िरत की दिशा सहित।

पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का आख़िरी ख़ुत्बा
Tahiru Nasuru··4 मिनट पढ़ने का समय

पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का आख़िरी ख़ुत्बा

पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का आख़िरी ख़ुत्बा 10 हिजरी (623 ईस्वी) में ज़ुल-हिज्जा की नौवीं तारीख़ को मक्का के अरफ़ात पर्वत की उरना घाटी में दिया गया। यह हज के सालाना अरकान का अवसर था। इसे हज्जतुल विदा भी कहा जाता है।

आमीन कहें: दुआ वॉल कैसे एक वैश्विक मुस्लिम समुदाय बना रहा है
Tahiru Nasuru··13 मिनट पढ़ने का समय

आमीन कहें: दुआ वॉल कैसे एक वैश्विक मुस्लिम समुदाय बना रहा है

जब दुनिया भर के मुसलमान एक ही डिजिटल मंच पर अपनी दुआएँ साझा करें, एक-दूसरे के लिए आमीन कहें, और ऐसा समुदाय बनाएँ जिसे दूरी अक्सर नामुमकिन बना देती है—तब क्या होता है?