Tahiru Nasuru··23 मिनट पढ़ने का समय
इस्लाम में संतान होना: एक पवित्र अमानत, आजीवन ज़िम्मेदारी और जन्नत का रास्ता
इस्लाम में संतान होना केवल व्यक्तिगत इच्छा, सामाजिक अपेक्षा या वैवाहिक जीवन का स्वाभाविक चरण नहीं है। यह अल्लाह ﷻ की ओर से एक पवित्र अमानत है। बच्चे को सिर्फ़ घर में जन्म नहीं मिलता, बल्कि वह उसके सुपुर्द किया जाता है—उसके शरीर, दिल, दिमाग़, आचरण, दीन और आख़िरत की दिशा सहित।
